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» » मेरी छत पर तिरंगा रहने दो!!

ये पेड़ ये पत्ते ये शाखें भी परेशान हो जाएं !
अगर परिंदे भी हिन्दू और मुस्लमान हो जाएं !!

न मस्जिद को जानते हैं , न शिवालों को जानते हैं ;
जो भूखे पेट होते हैं, वो सिर्फ निवालों को जानते हैं !!
मेरा यही अंदाज ज़माने को खलता है.

की मेरा चिराग हवा के खिलाफ क्यों जलता है ;
में अमन पसंद हूँ, मेरे शहर में दंगा मत रहने दो !!

लाल और हरे में मत बांटो, 
मेरी छत पर तिरंगा रहने दो !

Unknown

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