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राही मासूम रज़ा


-01 सितंबर 1927 को जन्मे राही मासूम रज़ा 1968 से मुंबई में रहने लगे थे। वे अपनी साहित्यिक गतिविधियों के साथ-साथ फिल्मों के लिए भी लिखते थे।

-राही स्पष्टतावादी व्यक्ति थे और अपने धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रीय दृष्टिकोण के कारण अत्यन्त लोकप्रिय हुए।

-मुंबई में रहते हुए राही ने-आधा गांव, नीम का पेड़, टोपी शुक्ला, दिल एक सादा कागज, ओस की बूंद,
हिम्मत जौनपुरी-उपन्यास तथा छोटी-बड़ी उर्दू नज़्में व गजलें कहीं।

-राही मासूम रज़ा का निधन: 15 मार्च 1992 को हुआ।

We were all humans until

“I said to my soul, be still and wait without hope, for hope would be hope for the wrong thing; wait without love, for love would be love of the wrong thing; there is yet faith, but the faith and the love are all in the waiting. Wait without thought, for you are not ready for thought: So the darkness shall be the light, and the stillness the dancing.” 




"Beautiful That Way"

Smile, without a reason why 
Love, as if you were a child, 
Smile, no matter what they tell you 
Don't listen to a word they say 
Cause life is beautiful that way. 

Tears, a tidal wave of tears 
Light, that slowly disappears 
Wait, before you close the curtain 
There is still another game to play 
And life is beautiful that way 

Here with his eyes forevermore 
I will always be as close as you 
remember from before 
Now that you're out there on your own 
Remember what is real and 
what we dream is love alone 

Keep the laughter in you eyes 
Soon your long awaited prize 
We'll forget about our sorrows 
And think about a brighter day 
Cause life is beautiful that way. 

We'll forget about our sorrows 
And think about a brighter day, 
Cause life is beautiful that way 
There's still another game to play 
And life is beautiful that way.


Song - "Beautiful That Way" - Noa
Theme song of "La Vita e Bella" by - Roberto Benigni
Music - Nicola Pivoani
Lyrics - Noa and Gil Dor

अगर आदमी ख़ुद से हारा न होता!!

अगर आदमी ख़ुद से हारा न होता ,
ख़ुदा को किसी ने पुकारा न होता !

कहां आसमां पर ख़ुदा बैठ जाता ,
जो हम ने ज़मीं पर उतारा न होता !

बदलता नहीं वक़्त यह रंग अपने , 
 किसी आदमी का गुज़ारा न होता !

नहीं ख़्वाब कोई हक़ीक़त में ढ़लता ,
जो दस्ते-जुनूं ने सँवारा न होता !

                          बुझानी अगर आग आसान होती ,
                          किसी राख में फिर अँगारा न होता !

                          कहीं पर भी होती अगर एक मंज़िल ,
                          तो गर्दिश में कोई सितारा न होता !

                          ये सारे का सारा जहां अपना होता ,
                          अगर यह हमारा तुम्हारा न होता !
                                                                           

अगर आदमी ख़ुद से हारा न होता / मधुभूषण शर्मा 'मधुर'

जीने_की_अदा_जाने!!

है दुनिया की कुछ परवा ,न कुछ अच्छा बुरा जाने
कोई समझे क़लंदर[1] उस को और कोई गदा[2] जाने

मदद से असलहों[3] की जो दुकां अपनी चलाता है
मुहब्बत, दोस्ती, एहसास, जज़्बा, फ़िक्र क्या जाने?

जिया जो दूसरों के वास्ते है बस वही इंसां
कि अपने वास्ते जीने को वो अपनी क़ज़ा[4] जाने

फ़राएज़[5] की जगह ऊँची न होगी जब तलक हक़ से
तो दुनिया भी तेरी बातों को गूंगे की सदा जाने

सऊबत[6] ज़िंदगी का हर सबक़ ऐसे सिखाती है
कि नादारी[7] में भी इंसान जीने की अदा जाने

नज़र में उन की गर मज़हब है इक शतरंज का मोहरा
तो फिर अंजाम कैसा, क्या, कहाँ होगा ख़ुदा जाने

वफ़ादारी ही जिस की ज़ात का हिस्सा रही बरसों
मगर ये क्या हुआ कि आज वो इस को सज़ा जाने

न जाने किस ज़माने में ’शेफ़ा’ वो शख़्स जीता है
जो ख़ुद्दारी[8], रवादारी[9], मिलनसारी, वफ़ा जाने!!
                                                            .जीने_की_अदा_जाने_/_इस्मत_ज़ैदी
शब्दार्थ:
  1. ऊपर जायें फ़क़ीर
  2. ऊपर जायें भिखारी, भिक्षुक
  3. ऊपर जायें हथियार
  4. ऊपर जायें मृत्यु, मौत
  5. ऊपर जायें कर्तव्य, फ़र्ज़, नमाज़
  6. ऊपर जायें कठिनता, कष्ट, दुश्वारी, पीड़ा, व्यथा, तकलीफ़
  7. ऊपर जायें ग़रीबी, दरिद्रता, मुफ़लिसी, निर्धनता
  8. ऊपर जायें स्वाभिमान, आत्मगौरव, आत्मसम्मान
  9. ऊपर जायें सहृदयता, उदारता

'मीर' कोई था 'मीरा' कोई लेकिन उनकी बात अलग / निश्तर ख़ानक़ाही

छोड़ो मोह! यहाँ तो मन को बेकल बनना पड़ता है
मस्तों के मयख़ाने को भी मक़तल बनना पड़ता है

सारे जग की प्यास बुझाना, इतना आसाँ काम है क्या?
पानी को भी भाप में ढलकर बादल बनना पड़ता है

जलते दिए को लौ ही जाने उसकी आँखें जानें क्या?
कैसी-कैसी झेल के बिपता, काजल बनना पड़ता है

'मीर' कोई था 'मीरा कोई लेकिन उनकी बात अलग
इश्क़ न करना, इश्क़ में प्यारे पागल बनना पड़ता है

शहर नहीं थे, गाँव से पहले जंगल बनना पड़ता है

"निश्तर" साहब! हमसे पूछो, हमने ज़र्बे झेली हैं
घायल मन की पीड़ समझने घायल बनना पड़ता है

हम पंछी उन्‍मुक्‍त गगन के!

हम पंछी उन्‍मुक्‍त गगन के
पिंजरबद्ध न गा पाएँगे,
कनक-तीलियों से टकराकर
पुलकित पंख टूट जाऍंगे।

हम बहता जल पीनेवाले
मर जाएँगे भूखे-प्‍यासे,
कहीं भली है कटुक निबोरी
कनक-कटोरी की मैदा से,

स्‍वर्ण-श्रृंखला के बंधन में
अपनी गति, उड़ान सब भूले,
बस सपनों में देख रहे हैं
तरू की फुनगी पर के झूले।

ऐसे थे अरमान कि उड़ते
नील गगन की सीमा पाने,
लाल किरण-सी चोंचखोल
चुगते तारक-अनार के दाने।

होती सीमाहीन क्षितिज से
इन पंखों की होड़ा-होड़ी,
या तो क्षितिज मिलन बन जाता
या तनती साँसों की डोरी।

नीड़ न दो, चाहे टहनी का
आश्रय छिन्‍न-भिन्‍न कर डालो,
लेकिन पंख दिए हैं, तो
आकुल उड़ान में विघ्‍न न डालो।

अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।


वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने हों बड़े,
एक पत्र छाँह भी,
माँग मत, माँग मत, माँग मत,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

तू न थकेगा कभी,
तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु श्वेत रक्त से,
लथपथ लथपथ लथपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
अग्निपथ / हरिवंश राय बच्चन

मुश्किलों में मुस्कुराना धर्म है।

जिन मुश्किलों में मुस्कुराना हो मना,
उन मुश्किलों में मुस्कुराना धर्म है।

जिस वक़्त जीना गैर मुमकिन सा लगे,
उस वक़्त जीना फर्ज है इंसान का,
लाजिम लहर के साथ है तब खेलना,
जब हो समुन्द्र पे नशा तूफ़ान का
जिस वायु का दीपक बुझना ध्येय हो
उस वायु में दीपक जलाना धर्म है।

हो नहीं मंजिल कहीं जिस राह की
उस राह चलना चाहिए इंसान को
जिस दर्द से सारी उम्र रोते कटे
वह दर्द पाना है जरूरी प्यार को
जिस चाह का हस्ती मिटाना नाम है
उस चाह पर हस्ती मिटाना धर्म है।

आदत पड़ी हो भूल जाने की जिसे
हर दम उसी का नाम हो हर सांस पर
उसकी खबर में ही सफ़र सारा कटे
जो हर नजर से हर तरह हो बेखबर
जिस आँख का आखें चुराना काम हो
उस आँख से आखें मिलाना धर्म है।

जब हाथ से टूटे न अपनी हथकड़ी
तब मांग लो ताकत स्वयम जंजीर से
जिस दम न थमती हो नयन सावन झड़ी
उस दम हंसी ले लो किसी तस्वीर से
जब गीत गाना गुनगुनाना जुर्म हो
तब गीत गाना गुनगुनाना धर्म है।

Happy Lohri

Wishing you a very Happy Lohri and Makar Sakranti as well.
May this harvest season bring you prosperity
And help you to fly high like a kite
Let us celebrate together.

Happy New Year 2016.

May God bless to each of you, to pour thousand blessings and protection in their lives and projects that the year ended has been of great experiences in your life, and what they learned this year, help us to be better people and us growth as human beings to face any difficulty that comes our way in the future. Happy New Year 2016.

Merry Christmas


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