13 अप्रेल 1919 आज ही के दिन भारत माता को अंग्रेजो के जाल से मुक्ति दिलाने के लिऐ प्रयासरत सैकङों देशभक्तों को जलियाँवाला बाग में जिंदा जला दिया गया ,उन महान सपूत देशभक्तों को कोटि-कोटि नमन व भावभीनी श्रद्धांजलि .....
मैं जलियांवाला बाग हूँ...
विप्लव राग कि सप्त-स्वरी
विद्रोह-वेदि की आग हूँ...
बहनों का उजड़ा सुहाग हूँ...
अपनों के शव से दबती
ब्रितानी सेना के बूटों से कुचले
शिशु-पुष्पों का पराग हूँ...
क्रान्ति क्षेत्र, शोणित सिंचित,
मैं जलियांवाला बाग हूँ...
भारत के ' भगत ' का महत्तीर्थ
मैं ' ऊधम ' का अनुराग हूँ...
पहले था शुष्क व अपसर्जित,
अब ऊष्ण-लहू का तडाग हूँ...
यातना से भावना जागृति "
का साक्षी भूभाग हूँ...
क्रान्ति क्षेत्र, शोणित सिंचित,
मैं जलियांवाला बाग हूँ...
महायुद्ध में फिरंगियों के
साथियों का मोह-त्याग हूँ...
तथाकथित उस ' सभ्य ' ब्रितानी
' सूर्य ' में काला दाग हूँ...
संवेदनशील मनों में चलता
विचार-क्रान्ति का याग हूँ...
क्रान्ति क्षेत्र, शोणित सिंचित,
मैं जलियांवाला बाग हूँ...
राष्ट्र-भाव से भरे हुए
हर क्रांत-दर्शी का दिमाग हूँ...
राष्ट्र-प्रेम के वासंतिक
उत्सव का रक्तिम फाग हूँ...
हर दमन-चक्र की तिमिर-निशा में
अविरल जलता चिराग हूँ...
क्रान्ति क्षेत्र, शोणित सिंचित,
मैं जलियांवाला बाग हूँ...
क्रान्ति क्षेत्र, शोणित सिंचित,
मैं जलियांवाला बाग हूँ...
जलियांवाला बाग में शहीद पूर्वजो को शत-शत नमन.
